भिलाई /स्वतंत्रता सेनानी और अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. रविशंकर शुक्ल और उनके पुत्र पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. विद्याचरण शुक्ल की जयंती का आयोजन 2 अगस्त, 2026 को सेक्टर-9 स्थित चौक रविशंकर शुक्ल के मूर्ति स्थल पर जयंती समारोह का आयोजन प्रातः 9.00 बजे से किया गया है।
आधुनिक भारत का औद्योगिक तीर्थ भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना को भिलाई में करने के लिए प्रेरक और अंततः उसे भिलाई में स्थापित करवाने वाले दृढनिश्चयी पं रविशंकर शुक्ल का जन्म 2 अगस्त को हुआ था। उनके पुत्र और पूर्व केन्द्रीय मंत्री पं विद्या चरण शुक्ल का जन्मदिन भी 2 अगस्त को रहता है। 
जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर और शुक्ल सांस्कृतिक और सामाजिक समिति के महासचिव मनोज मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया है कि 2 अगस्त, 2026 को सुबह 9.00 बजे सेक्टर-9 चौक में पं रविशंकर शुक्ल मूर्ति स्थल पर जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। सभी कांग्रेस जनों, शुक्ल समर्थकों और भिलाई की इस्पात बिरादरी को इस आयोजन में आमंत्रित रहने और अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित करने का आग्रह किया है।
भिलाई इस्पात संयंत्र के संस्थापक पं रविशंकर शुक्ल की जयंती का यह आयोजन प्रतिवर्ष भिलाई इस्पात संयंत्र के क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं विभाग के माध्यम से आयोजित किया जाता हैं।
अविभाजित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भविष्य के स्वप्नदृष्टा एवं जननेता पंडित रविशंकर शुक्ल ने देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र की भिलाई में स्थापना में आधारभूत भूमिका निभाई थी। पं. जगन्नाथ शुक्ल एवं श्रीमती तुलसी देवी के पुत्र के रूप में 2 अगस्त, 1876 में सागर में जन्में पं. रविशंकर शुक्ल ने अपनी मिडिल स्कूल की शिक्षा राजनांदगांव से शुरू की। जबलपुर के राॅबिनसन काॅलेज से इंटरमिडियेट और नागपुर के हिसलाॅप काॅलेज से शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही युवा पं. शुक्ल कांग्रेस के आंदोलन से प्रभावित हो गये थे। 1898 में अमरावती में हुए कांग्रेस के 13 वें अधिवेशन में पं. शुक्ल ने अपने शिक्षक के साथ भाग लिया और देश के अनेक तत्कालीन महानायकों के संपर्क में आये। यहीं से पं. शुक्ल की राजनैतिक जीवन और आजादी के आंदोलन की यात्रा प्रारंभ हुई। 50 वर्ष के अपने राजनैतिक एवं सामाजिक जीवन में पं. शुक्ल ने अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास, शिक्षा और आधारभूत संरचनाओं की स्थापना के लिये महत्वपूर्ण और स्मरणीय कार्य किये। पूर्व सी पी एवं बरार तथा अविभाजित मध्य प्रदेश के विकास में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जायेगा। मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे पं. रविशंकर शुक्ल ने 31 दिसम्बर, 1956 में 80 वर्ष की उम्र में नई दिल्ली में अंतिम सांँस ली।
अविभाजित मध्यप्रदेश से केन्द्रीय राजनीति में सशक्त और अहम भूमिका निभाने वाले दबंग राजनेता विद्याचरण शुक्ल का जन्म भी 2 अगस्त 1929 को हुआ था।
भारतीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियो मे एक रहे है। पं विद्याचरण शुक्ल के बडे भाई पंडित श्यामा चरण शुक्ल भी अविभाजित मध्यप्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। विद्या चरण शुक्ल ने 1951 में नागपुर के मोरिस कॉलेज से बीए किया।
1957 मे पहली बार महासमुंद से लोकसभा चुनाव जीते और सबसे युवा सांसद बने। वे रिकॉर्ड नौ बार लोकसभा के सांसद रहे। 1966 मे पहली बार इंदिरा गाँधी कैबिनेट में शामिल हुए ।श्री चन्द्रशेखर सरकार में वे केन्द्रीय विदेश मंत्री रहे।
1966 में जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी, तो उन्होंने श्री विद्या चरण शुक्ल को कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया। राजनीतिक सफर के दौरान उन्हें कई बेहद महत्त्वपूर्ण मंत्रालय मिले जैसे दूरसंचार, गृह, रक्षा, वित्त, योजना, सूचना एवं प्रसारण, विदेश, संसदीय, जल संसाधन।
25 मई, 2013 को कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 27 लोग मारे गए और इसी हमले श्री विद्या चरण शुक्ल को गोली लगने एवं 31 अन्य लोग जख्मी हो गए थे। शुक्ल को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका दुखद निधन हो गया।



