भिलाई। छत्तीसगढ़ को अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सर्वधर्म सेवा संस्था, भिलाई के संस्थापक प्रतीक भोई की अगुवाई में, संस्था के संरक्षक इंद्रजीत सिंह (छोटू भईया) के सहयोग एवं मार्गदर्शन में राकेश रत्नाकर (महासचिव), घनश्याम पांडे (उपाध्यक्ष), रघुवंश सैनी (सचिव) एवं वसंत सालनकर के प्रतिनिधिमंडल ने माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट कर उन्हें 16 सूत्रीय चरणबद्ध कार्ययोजना एवं सुझाव-पत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश में अंगदान एवं देहदान को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाए तथा अंगदान करने वाले दाताओं को मरणोपरांत राजकीय सम्मान प्रदान करने की नीति बनाई जाए। संस्था का मानना है कि इससे समाज में अंगदान के प्रति सम्मान, विश्वास और जागरूकता का वातावरण बनेगा तथा अधिक से अधिक लोग इस महादान के लिए प्रेरित होंगे।
संस्था ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वह पिछले 22 वर्षों से अंगदान, देहदान, रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है तथा अब तक 400 से अधिक नागरिकों को अंगदान संकल्प से जोड़ चुकी है।
संस्था विगत पाँच वर्षों से अंगदान करने वाले दाताओं को मरणोपरांत राजकीय सम्मान दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इस संबंध में संस्था का प्रतिनिधिमंडल पूर्व में उपमुख्यमंत्री श्री टी. एस. सिंहदेव, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं शासन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भेंट कर अपना निवेदन प्रस्तुत कर चुका है। संस्था को विश्वास है कि इस मानवीय पहल को शीघ्र ही सकारात्मक रूप मिलेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक मरीजों को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, जबकि अंगों की कमी के कारण हजारों मरीज समय पर उपचार नहीं मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं। मृतक अंगदान की दर अभी भी लगभग 1 व्यक्ति प्रति दस लाख आबादी (1 PMP) से कम है। यदि छत्तीसगढ़ समय रहते प्रभावी कदम उठाता है, तो वह अंगदान के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी उल्लेख किया कि कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा तथा मध्यप्रदेश जैसे राज्यों ने अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रभावी नीतियाँ, जन-जागरूकता अभियान तथा संस्थागत व्यवस्थाएँ विकसित की हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप वहाँ अंगदान के प्रति जनविश्वास बढ़ा है और अंगदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। संस्था का मानना है कि यदि छत्तीसगढ़ भी ऐसी दूरदर्शी पहल करता है, तो वह शीघ्र ही अंगदान के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना सकता है।
संस्था द्वारा प्रस्तुत 16 सूत्रीय कार्ययोजना में अंगदाताओं को मरणोपरांत राजकीय सम्मान, मुख्यमंत्री सम्मान-पत्र, विश्व अंगदान दिवस पर अंगदाता परिवारों का सार्वजनिक सम्मान, “अंगदाता स्मृति दीवार”, राज्य स्तरीय ऑनलाइन अंगदान पोर्टल, डिजिटल अंगदाता कार्ड, मोबाइल ऐप एवं हेल्पलाइन, प्रमुख अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण सुविधाओं का विस्तार, प्रत्येक जिले में अंगदान समन्वयक की नियुक्ति, चिकित्सकों का विशेष प्रशिक्षण, ग्रीन कॉरिडोर, ड्रोन आधारित अंग परिवहन व्यवस्था तथा “मुख्यमंत्री अंगदान मिशन छत्तीसगढ़” जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं।
माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना तथा विषय पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
सर्वधर्म सेवा संस्था ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि शासन, चिकित्सा संस्थानों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।



