January 20, 2022

राजस्थान में ब्लैक फंगस हरियाणा की तर्ज पर गहलोत सरकार ने बीमारी को नोटिफाई किया,

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जयपुर : राजस्थान सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है। प्रदेश में कोरोना से ठीक हुए मरीजों में यह बीमारी तेजी से फैल रही है, जिससे राज्य के अंदर दो व्यक्तियों की मौत भी हो गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक दिन पहले इसे राजस्थान की हेल्थ इंश्योरेंस चिरंजीवी योजना में शामिल किया था। इसके बाद अब यह कदम उठाया है। जयपुर, जोधपुर के बाद यह बीमारी सीकर, पाली, बाड़मेर, बीकानेर और कोटा के अलावा अन्य जिलों में भी तेजी से फैल रही है। इसे देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। महामारी में शामिल करने का मकसद यह बताया जा रहा है कि अब इस बीमारी की प्रभावी मॉनिटरिंग हो सकेगी, साथ ही इलाज को लेकर गंभीरता बरती जा सकेगी।

राजस्थान में जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर समेत कई जिलों में इसके करीब 400 मामले हैं। अकेले जयपुर के एसएमएस हाॅस्पिटल में 45 से अधिक मरीज भर्ती हैं। अस्पताल में 33 बेड का वार्ड फुल होने के बाद अलग से नया वार्ड बनाया गया है। जयपुर में निजी अस्पतालों में अब तक इस बीमारी के 70 से अधिक केस आ चुके हैं। जोधपुर में एम्स और मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में 100 से अधिक मामले आ गए हैं। बीकानेर में 30 से ज्यादा मामले आ चुके हैं, लेकिन प्रदेश में ऐसे 100 ही मामले रिपोर्ट हैं। इसके पीछे कारण है कि अब तक प्रदेश में इस बीमारी को नोटिफाइड डिजीज घोषित नहीं किया गया था। इसलिए सरकार के पास इसके आंकड़े नहीं हैं। अब सरकार ने हरियाणा सरकार की तर्ज पर इसे भी नोटिफाइड डिजीज घोषित कर दिया है।

राजस्थान में इतनी चिंता क्यों ?

इस फंगस व इंफेक्शन को रोकने के लिए एकमात्र इंजेक्शन लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी आता है, जिसकी उपलब्धता बाजार में न के बराबर है। पीड़ित मरीजों के परिजन इंजेक्शन के लिए इधर से उधर भटकने को मजबूर है। इसे देखते हुए सरकार ने इस इंजेक्शन की मांग केन्द्र सरकार से की है। इसके अलावा इस इंजेक्शन की खरीद के लिए सरकार ने 2500 वाइल खरीदने के सीरम कंपनी को ऑर्डर भी दिया है।

ब्लैक फंगस क्या है और क्यों होता है?

कोरोना पीड़ितों को कोरोना संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए स्टेरॉयड दिया जाता है। इससे इंसान की इम्यूनिटी कम हो जाती है। इससे मरीज का ब्लड शुगर का लेवल भी अचानक बढ़ने लग जाता है। इसका साइड इफेक्ट म्यूकोरमाइकोसिस के रूप में झेलना पड़ रहा है। प्रारम्भिक तौर पर इस बीमारी में नाक खुश्क होती है। नाक की परत अंदर से सूखने लगती है व सुन्न हो जाती है। चेहरे व तलवे की त्वचा सुन्न हो जाती है। चेहरे पर सूजन आती है। दांत ढीले पड़ते हैं। इस बीमारी में आंख की नसों के पास में फंगस जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटाइनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। इससे अधिकांश मरीजों में आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है। इसके अलावा कई मरीजों में फंगस नीचे की ओर फैलता है तो जबड़े आदि को खराब कर देता है।