July 29, 2021

सुपेबेड़ा पहुंची राज्यपाल से विधवा ने मांगी इच्छामृत्यु

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तत्काल मिली साढ़े आठ हजार नौकरी
गरियाबंद।
किडनी रोग को लेकर प्रदेश में चर्चित देवभोग ब्लाक के गांव सुपेबेड़ा में उस समय हड़कंप मच गया । जब प्रशासनिक व्यवस्था से परेशान एवं आर्थिक तंगी जुऌा रही एक विधवा ने राज्यपाल अनुसुईया उइके के समक्ष इच्छामृत्यु की मांग की। इस पर राज्यपाल ने विधवा को साढ़े आठ हजार रुपए की मासिक वेतन की नौकरी देने की घोषणा की ।
प्रदेश की राज्यपाल अनुसुईया उइके मंगलवार को किडनी रोग पीडि़तों से मिलने देवऽोग ब्लाक के ग्राम सुपेबेड़ा पहुंची थी। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, सांसद चुन्नीलाल साहू और विधायक डमरुधर पुजारी समेत आला अधिकारी सुपेबेड़ा पहुंचे हैं। यहां पर राज्यपाल ने ग्रामीणों से सीधे चर्चा की। इस दौरान सुपेबेड़ा की महिला लक्ष्मी सोनवानी ने बताया कि उनके पति शिक्षक थे। साल भर पहले 2018 में उसके पति की किडनी रोग के चलते मौत हो गई थी। तब से उनके तीन बच्चों की परवरिश और रोजी. रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। महिला ने बताया कि पति की मृत्यु के बाद से वे रोजगार के लिए प्रशासनिक तंत्र का चक्कर काट रही हैं। इसके बाद भी उन्हें अब तक रोजगार नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि उनके पति ने मकान बनाने के लिए ग्रामीण बैंक से चार लाख का लोन लिया था । तबीयत खराब होने के कारण मकान के लिए ऋण को भी पति को इलाज में लगा। बैंक वाले अब लोन के पैसा को गारेंटर से वसूल रहे हैं। ऐसी स्थिति में गारेंटर के परिजन आए दिन ऽााला.बुरा सुनाते है। पति के मौत के बाद घर में कमाने वाला कोई नहीं हैं। ऐसे में उन्हें अपने तीन बच्चों को पालन एवं घर चलाने में दिक्कत हो रही है। इससे परेशान होकर महिला ने राज्यपाल के समक्ष इच्छामृत्यु की मांग की। इसी तरह की परेशान एक अन्य महिला वैदेही चतुर्वेदी ने ऽाी बताई। उनके भी पति शिक्षक थे। उन्हें भी आज तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली है । राज्यपाल ने इन महिलाओं की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल उन्हें दैनिक वेतनऽोगी के रुप में साढ़े आठ हजार रुपए मासिक वेतन मेंनौकरी की घोषणा की। ये महिलाएं इसी माह से दैनिक वेतनऽोगी के रुप मेंअपनी सेवाएं दे सकती है।
सुपेबेड़ा को लेकर सीएम व मंत्री चिंतित राज्यपाल ने कहा कि सुपेबेड़ा की समस्या को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी सिंहदेव काफी गंभीर हैं और वे अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रहे हैं कि ग्रामीणों को राहत मिले और इनके प्रयास से जरूर परिणाम निकालेंगे मैं आश्वस्त हूं। उन्होंने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री ने स्वयं आश्वासन दिया है कि जल्द ही यहां की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। हालांकि यह समस्या लगभग 10-15 साल पुरानी हैए लेकिन जल्द से जल्द यहां की समस्याओं को हल किया जाएगा।
कुछ साल पहले हीरा खदान में जो ब्लास्ट हुआ था, उसकी भी आशंका को नकारा नहीं जा सकता। यह भी संभव है कि यहां के जेनेरेटिक व हैवी मेटल अन्य समस्याओं के चलते यह बीमारी हो रही है। पानी में भी हैवी मेटल पाए गए हैं। इसको भी दूर करने की कोशिश की जाएगी । साथ ही मैं यह भी कोशिश करूंगी कि दिल्ली से एक विशेष जांच टीम में पहुंचे और यहां की समस्याओं को देखते हुए इसे हल करने का प्रयास करें। सरकारी मददगार ने सिस्टम को कोसाकिडनी रोग पीडि़तों के लिए सरकारी मददगार बने त्रिलोचन सोनवानी ने राज्यपाल को बताया कि हम सब सरकार के सिस्टम के मारे हैं तभी हम लोगों के हैं 71 मौतें हुई हैं । आपकी सिस्टम इतनी लापरवाह और गैर जिम्मेदाराना है कि हमारे लंबे समय से मांग करने के बाद भी हमें देखने वाला कोई नहीं था। यहां ये बताना लाजिमी होगा कि त्रिलोचना को सरकार ने किडनी रोग पीडि़तों के मदद के लिए रायपुर के मेकाहारा में तैनात किया है। स्वास्थ्य मंत्री बंगले से उनका सीधा संपंर्क है। उन्होंने बताया कि हम रायपुर जाते हैं अस्पताल में तो हमारा पूछने वाला कोई नहीं होताए हम वहां परेशान होते हैंए दवाइयां ऽाी खरीद कर खाना पड़ता है। 12 घंटे यहां हम लोग काम करते हैं और वहां जाने के बाद जो स्थितियां बनती हैए उससे हम काफी दुखी हैं। हम मेकाहारा अस्पताल नहीं जाना चाहते । अस्पताल में कहा जाता है कि बाहर से इलाज दवा लाना पड़ेगा। यह एक अच्छी बात नहीं है, यह मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है और हमें मेकाहारा अस्पताल पर भरोसा नहीं है। इन सारी समस्याओं को सुनने के बाद राज्यपाल ने कहा कि यहां की सारी समस्या मेरी है अब आप मुझ से सीधा संपर्क करिए मैं आश्वस्त करती हूँ कि आप लोगों की समस्याओं को दूर किया जाएगा। राज्यपाल अनुसुईया उइके हुई भावुकजिले के किडनी बीमारी से प्रभावित गांव सुपेबेड़ा में राज्यपाल अनुसुइया उइके मरीजों से चर्चा के दौरान भावुक हो गईं। राज्यपाल ने सुपेबेड़ा के ग्रामीणों से कहा कि अब चिंता की कोई बात नहीं है। सुपेबेड़ाअब मेरी जिम्मेदारी है। एक आंकड़े के अनुसार पिछले तीन साल में किडनी की बीमारी से पीडि़त सुपेबेड़ा के 71 लोगों की मौत हो चुकी है। यही नहीं गांव में 200 से ज्यादा किडनी मरीज बेहतर इलाज के लिए परेशान हैं। इसे लेकर पिछले दिनों महासमुंद सांसद चुन्नीलाल साहू ने राज्यपाल से मुलाकात की थी। इसके बाद राज्यपाल ने सुपेबेड़ा में निरिक्षण का शेड्यूल तय किया था। इसके तहत ही मंगलवार को राज्यपाल, मंत्री, सांसद व आला अफसर वहां पहुंचे थे।