January 20, 2022

बिन मां – बाप की बेटी के हाथ पीले कराने मोहल्ले वाले बने घराती,रिश्ता तय कराने से लेकर दहेज के लिए प्रदान किया सहयोग, दो साल पहले पिता की मौत के बाद कोरोना ने छीनी मां की ममता

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भिलाई/ एक बिन मां – बाप की बेटी की शादी मोहल्ले के लोगों ने मिलकर किया. शादी के लिए रिश्ता तय करने से लेकर नव दम्पत्ति के रूप में गृहस्थी शुरू करने मोहल्ले वासियों ने दहेज की भी व्यवस्था मिलकर की. जिस बेटी की शादी हुई, उसके सिर से पिता का साया दो साल पहले ही उठ गया था. इस कोरोना काल ने उसे मां की ममता से भी वंचित कर डाला.
सुपेला के वार्ड -12 सड़क – 7 पांच रास्ता में रहने वाली मनीषा यादव के लिए आज का दिन यादगार लम्हों में दर्ज हो गया. आज मनीषा की शादी परिया पारा जुनवानी के अनिल यादव के साथ कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुआ. मनीषा के माता – पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे. दो बड़ी बहनें शादी के बाद अपने – अपने ससुराल में रहतीं है. मनीषा की शादी में दोनों बहनों के साथ सीमित संख्या में नजदीकी रिश्तेदार शामिल हुए. लेकिन मोहल्ले वासियों ने घराती की भूमिका निभा कर एक अनुकरणीय मिसाल पेश किया है.
दरअसल, दो साल पहले पिता तिहारू यादव के निधन के बाद मनीषा अपनी मां संवारिन बाई के साथ रह रही थी. संवारिन बाई झिल्ली बीन कर अपना और मनीषा का पेट भरती थी. इसी कोरोना काल में 6 अप्रैल को संवारिन बाई की मौत हो गई तो घर पर मनीषा अकेली रहने लगी. उसके अकेलेपन को दूर करने मोहल्ले के महिला और पुरूष पालक बन गए. लेकिन अकेली लड़की की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बनी रही. मोहल्ले वालों को पता चला कि उसकी मां के रहते एक लड़का शादी के लिए मनीषा को देखने आया था. मोहल्ले के कुछ वरिष्ठ लोगों ने फिर से अनिल के परिवार वालों से पहल की. आखिरकार आज मनीषा और अनिल परिणय सूत्र के बंधन में आबद्ध हो गए.
नव दम्पत्ति को दिनेश शुक्ला एवं डॉ. विमल ने एक गैस कनेक्शन, सुखराम प्रोडक्ट के संचालक ने आलमारी, विजय गुप्ता ने कुलर, दिलीप टंडन ने पलंग, शुभांक ने गद्दा, राजीव गुप्ता ने ड्रेसिंग टेबल और नमन फाउंडेशन की ओर से मिक्सी व टिफिन डिब्बा उपहार स्वरूप प्रदान किया गया. जबकि टेंट पंडाल की व्यवस्था सतीश खन्ना की तरफ से किया गया और भोजन की पूरी व्यवस्था वार्ड पार्षद एवं जोन अध्यक्ष भोजराज भोजू ने की.
** नहीं खली माता पिता की कमी – मनीषा
दुल्हन मनीषा ने कहा कि मोहल्ले के सभी लोगों ने जिस आत्मीयता के साथ उसकी शादी का जिम्मा उठाया, उससे जीवन के इस खास अवसर पर उसे अपने माता पिता की कमी का अहसास नहीं हुआ. कोरोना काल में मां गुजर गई तो मोहल्ले में ही अनेक माताएं मिल गई. बड़े बुजुर्गों ने उसे पिता के नहीं रहने का भी अहसास होने नहीं दिया.