July 29, 2021

शरद पवार ने कहा- सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू, 5 साल पूरे करेंगे; मुलाकात के लिए राज्यपाल से वक्त मांगा

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मुंबई. महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बनाने के लिए शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की समन्वय समिति की पहली बैठक में सामान्य साझा कार्यक्रम (सीएमपी) की रूपरेखा तय हो चुकी है। शुक्रवार को शरद पवार ने कहा- सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू, 5 साल पूरे करेंगे। हमने मुलाकात के लिए राज्यपाल से शनिवार दोपहर 3 बजे का वक्त मांगा है।
पवार ने कहा- पार्टियां स्थिर सरकार चाहती हैं, जिनका मकसद विकास करना होगा। मध्यावधि चुनाव की कोई गुंजाइश नहीं है। यह सरकार बनेगी और अपना पांच सालों का कार्यकाल पूरा करेगी। हम सभी यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकार पांच साल तक चलेगी।
साझा कार्यक्रम में महाराष्ट्र के हितों का ध्यान रखा जाएगा: शिवसेना
इससे पहले शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा था कि साझा कार्यक्रम में महाराष्ट्र के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। पूरे 5 साल शिवसेना का ही मुख्यमंत्री होगा। वहीं, राकांपा नेता नवाब मलिक ने कहा कि शिवसेना के साथ आने में कांग्रेस कुछ हिचकिचा रही है। ड्राफ्ट की कॉपी सोनिया गांधी को भेजी है, अगर कांग्रेस साथ नहीं आई तो सरकार नहीं बनाएंगे।
मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ा: मलिक
मलिक ने कहा- ”मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ा है। इसलिए उसके सम्मान और स्वाभिमान को जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए सभी दलों को साथ आना होगा। लेकिन कांग्रेस इससे कुछ हिचकिचा रही है। साझा कार्यक्रम का ड्राफ्ट सोनिया गांधी को भेजा गया है। अगर वो साथ नहीं आएगी तो सरकार नहीं बनाएंगे। राष्ट्रपति शासन लगने से प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। राज्य के किसान परेशान हैं, उन्हें फसल की बुआई करनी है। तीनों पार्टियों ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात करने की योजना बनाई है।”
ड्राफ्ट में किसानों का मुद्दा प्रमुखता से शामिल
तीनों दलों की समन्वय समिति की गुरुवार को बैठक हुई। इसके बाद कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने बताया कि ड्राफ्ट में किसानों का मुद्दा प्रमुखता से शामिल है। केवल एक-दो मुद्दों पर चर्चा होनी बाकी है। नई सरकार में मुख्यमंत्री पद शिवसेना के पास ही रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, राकांपा उपमुख्यमंत्री पद पर मान गई है। बैठक में राकांपा प्रदेश प्रमुख जयंत पाटिल, राकांपा नेता छगन भुजबल और पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक, कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण, मणिकराव ठाकरे, विजय वडेट्टीवर, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और सुभाष देसाई शामिल हुए।
शिवसेना के सामने रखी कट्‌टरपंथी छवि से बाहर आने की शर्त
कांग्रेस और राकांपा ने शिवसेना के सामने कट्टरपंथी हिंदूवादी पार्टी की छवि से बाहर आने की शर्त रखी है। कांग्रेस को शिवसेना को समर्थन देने से सबसे ज्यादा हिचक उसकी इसी छवि को लेकर है। वहीं राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 17 नवंबर को दिल्ली में शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार बनाने के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
तीनों दलों के बीच सहमति बनी है कि प्रत्येक पार्टी के हर चार विधायकों पर एक मंत्री हाेगा। यह फाॅर्मूला लगभग तय है। शिवसेना के 56 विधायक हैं, उन्हें सात अन्य विधायकों का समर्थन है यानी शिवसेना के कुल 63 विधायक हैं। ऐसे में उसके 15 या 16 मंत्री होंगे। राकांपा के 11 या 12 मंत्री होंगे। वहीं कांग्रेस के 44 विधायक हैं, ताे उसे खाते में 11 मंत्री हाेंगे।